Lahar

स्वतंत्रता के बाद भी  पारदी समुदाय के लोग बहुत थोड़े से में गुजर-बसर कर लेते हैं इन लोगों ने अलग-अलग जनजाति के लोग इन्हें अलग-अलग नामों से जानते हैं जैसे कि गाय पारदी हरण पारदी चिता पारदी लंगोटी पारदी  मेल शिकारी टाकनकार पारदी   निमाड़ी पारदी जो की मध्य प्रदेश के निमाड़  और से आए हुए हैं या तो फिर वहीं बसते हैं इसलिए उन्हें निमाड़ कहा जाता है फांसी पारदी यह पारदी समुदायों में से एक अलग संस्कृति वाली  उप जात है ऊपर बताए गए जाति का वर्णन यह सरकार रिकॉर्ड है जंगल में बसने वाली है जनजाति के लोग शुरू से नागरी से  शहरी इलाके से डरते थे जैसे कोई नाम से अगर डर लगता हो और लोगों ने डराते हो तो यह लोग अपना नाम काम हुलिया सब बदल देते हैं इसलिए वे एक ही जाति के होकर भी अलग-अलग नामों से अलग अलग संस्कृति से पहनावे से खानपान से रीत रिवाज से रोटी बेटी से अलग ही होकर रह गए अभी भी यह जनजाति के लोग दुर्धरा रहने वाले समान संस्कृति वाले रीति रिवाज वाले लोगों से परिजनों से अपनी बिटिया नहीं ब्याहते। चाहे वे एक ही घर में एक ही दामाद को अपने दो से तीन बिटिया ब्याह दी जाती है इस कारणवश इन लोगों मे एकजुटता नहीं देखी जा  सकती ।

भले ही सरकार के रिकॉर्ड में अलग-अलग नामों से यह जनजाति पहचानी जाती हो पर यह जनजाति में कूल दो ही जनजाति मानी जाती है एक गांव पारदी दूसरा फासे पारदी मानव जाति के विकास के बाद में जब नागरी लोकजीवन लोग जीने लगे खेती-बाड़ी उद्योग धंधा व्यवसाय नौकरी इन कारणवश लोगों ने एक जगह रह कर अपना जीवन यापन करना शुरू किया तब पारदी समुदाय के कुछ लोगों ने अपने लोगों से दूर रहकर गांव में अपना जीवन यापन करना शुरू कर दिया व्यवसाय की तौर पर इन्होंने रखवारी करना जागीरदार जमीदार इन लोगों के पहरे का काम करना गांव की रखवाली करना खेती की रखवाली करना और घटिया बनाना इस काम  को लेकर वे गांव में बस गए यह अनुमान है

  पारदी समुदाय के लोगों में आने वाले फांसी पारदी इन लोगों ने अपने परंपराओं के अनुसार जंगल में रहना पसंद किया जंगलों से उनके 80 फ़ीसदी जीवन यापन करने के संसाधन मिल जाया करते थे पाखी गुजर-बसर के लिए वे गांव से कुछ साधन ले लेते थे पर इनका मुख्य व्यवसाय शिकार करना जंगल से जड़ी-बूटी निकालना दीर्घायु से जीने के लिए लगने वाली हर चीज को वे संभलकर और उसका प्रचार कर कर अपने आने वाली पीढ़ी को जागृत करते रहते थे उनके  सिखाई गई चीजों से आज भी बुजुर्ग लोग इलाज करते आ रहे हैं अभी भी इस जनजाति के लोग दिल दृश्य है और 100 से भी ज्यादा साल जीते हैं लेकिन इनका कोई कागजीपुरा आवा ना होने के कारण उनका  यह सिर्फ अनुमान ही रह जाता है विज्ञान के विकास के इतने सालों बाद भी फसे पारदी समुदाय की औरतें हॉस्पिटल में जाकर डिलीवर नहीं होती है वे अभी भी पाल बस्ती जंगल पहाड़ कहीं भी अपने बच्चे को जन्म देने में सक्षम रहती है यह एक निसर्ग का वरदान ही माना जाएगा जमाना बदल गया है इसलिए अब कुछ पैमाने में हॉस्पिटल अपनाया जा रहा है

   इनकी संस्कृति अलग अलग अलग-अलग तरह की बदलाव से गुजरी है जैसे कि शुरू से यह लोग कोई व्यक्ति मर जाने पर उसे दफनाया जाता है पर अब कुछ जगह पर जलाया भी जाने लगा है इनकेश शादी-ब्याह के तरीके सबसे अलग और अजीबोगरीब है इनकी शादी का मुख्य भाग तो हल्दी ही होता है उसके बाद में नागिन का पान थाने से शुरू होकर 3 दिनों तक रस्म निभाई जाती है उसके अंदर शुरू में नवरदेव के यहां  खाना खिलाया जाता है बाद में दुल्हन के यहां खाना खिलाया जाता है और शादी हो जाने के बाद दूल्हा दुल्हन चाहे तो ससुराल या अपने मायके भी दुल्हन धुले को ले जाती है शादी के बाद में दूल्हा और दुल्हन को अपनी जिंदगी की शुरुआत में से करनी पड़ती है या तो दूल्हे के मां बाप से कुछ मिल पाता है ना दुल्हन के ससुराल से कुछ मिलता है शादी में जो मिलता है उसे से उनको गुजर-बसर करने पड़ती है शिकार के लिए बांबू की गाड़ियों का पिंजरा दिया जाता है और एक गाय या बेल यह देकर उनको अलग से जीने के लिए कहा जाता है वहीं से उनको अपनी शुरुआत करनी पड़ती बदलाव के कारण इसमें भी  अब फर्क आया है

क्रमशः

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फासे पारधी समाजाचे शिकारीचे तंत्र..............................फासे पारधी शिकार का तंत्र यह जानने के लिए हास्य पारदी यह शब्द का अर्थ जान लेना अवश्य है इस जनजाति के लोगों को पारदी इस नाम से संबोधित है करते हैं फांसे यानी कि जाल पारद यानी के शिकार इस जनजाति के अंदर मुख्य 2 जाति मानी जाती है अलग अलग जगह पर अलग-अलग नामों का उल्लेख कर पहचानी जाने वाली यह जाति मुख्य दो हिस्सों में बैठी है इन्हें हमारे पूर्वज सिर्फ दो ही जाति में बतेहुए का दावा करती है फांसे पारदी और गांव पारदी यह दो मुख्य जाती मानी जाती हैं फांसे यानी की जाल पहले शिकार करना ऐसा माना जाता है और जाल बुनकर उसका झाला बना कर पंछी हिरन खरगोश आदि का शिकार करना यानी के फ़ासे पारदी इनमें उदाहरणार्थ गाय पारदी पाल पारदी लंबाडी पारदी तकोन्नकर पारदी जड़ी बूटी बेचने वाली पारदी मालाएं बनाकर बेचने वाले पारदी ऐसे अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं इनमें और भी बहुत संख्या नाम जोड़े गए हैं जंगल में रहकर शिकार को जाले में पकड़ने वाले पारदी ओं को फांसी पारदी कहा जाता है पंछी को पकड़ने के लिए गाय का उपयोग किया इसलिए उन्हें जाए पारदी कहा जाता है जगह पर रहकर शिकार करना अवघड होता है इसलिए उन्हें गाय पारदी कहा जाता है